क्या है रेलवे परीक्षार्थियों के विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण? रेल मंत्री के अनुसार कैसे होगा इनकी समस्याओं का समाधान?

रेलवे भर्तियों में हो रही गड़बड़ी को लेकर छात्र लगातार कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहें है। यह प्रदर्शन मुख्य रूप से गैर-तकनीकी लोकप्रिय श्रेणियों (एनटीपीसी) पदों के लिए सामान्य परीक्षा के लिए उपस्थित होने वाले उम्मीदवारों के एक बड़े हिस्से के लिए है। RRB-NTPC के रिजल्ट में धांधली के विरोध में यूपी-बिहार के छात्रों का प्रर्दशन अभी तक ज़ारी है।

बिहार के कई इलाक़े जैसे पटना, नवादा, नालंदा, बक्सर, आरा, गया सहित कई अन्य इलाक़े इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बने हुए है, इसके अलावा पटना, भागलपुर और सासाराम में भी छात्र रेलवे ट्रैक पर उतर गए और नारेबाजी करने लगे। छात्रों ने रेलवे ट्रैक को जाम कर ट्रेनों की आवाजाही रोक रखी है, कई जगह पर ट्रैन में आगजनी के भी मामले सामने आये है जिसमे रेलवे प्रॉपर्टी को काफी हानि पहुंची, इस दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों में झड़प भी हुई।  

क्या है छात्रों के हिंसक प्रदर्शन का मुख्य कारण?

रेलवे हो या कोई भी अन्य सेक्टर उनमें पहले के अपेक्षा वेकेंसी काफी कम हो गई है। प्राइवेट सेक्टर का हाल कोरोना की वजह से बुरा है। ऐसे में दिन-रात तैयारी करने वाले स्टूडेंट डरे हुए हैं कि उनका भविष्य आखिर क्या होगा। परीक्षा और रिलज्ट की इतनी लंबी प्रक्रिया ने अभ्यर्थियों को कंफ्यूज कर दिया है। उस पर उन्हें इस तरह से छांटा जा रहा है कि ऐसे में उनका गुस्सा होना एकदम जायज़ नजर आता है। यह आंदोलन अगर पूरे देश का आंदोलन भी बन जाए तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। यहां समझिए आखिर किन वजहों से उग्र हो रहे हैं युवा-

2019 में निकाली गयी थी रेलवे की तरफ से वैकेंसी रेलवे भर्ती बोर्ड ने 2019 में ग्रुप सी के पदों के लिए नोटिफिकेशन निकाला था जिसमे 37 हजार पदों पर वैकेंसी निकाली गई। 2020 में आंदोलन हुआ। 2021 में परीक्षा ली गई लेकिन रिजल्ट अब 2022 में दिया गया है। 14 जनवरी की रात 8 बजे रेलवे- NTPC परीक्षा का रिजल्ट आया। इस परीक्षा का क्वालिफिकेशन इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन रखा गया था।

NTPC का मतलब और इसके तहत किन पदों की परीक्षा ली गई?- युवाओं का गुस्सा भड़का हुआ है रेलवे NTPC के परीक्षा परिणाम को लेकर। NTPC का मतलब है- नन टेक्निकल पॉपुलर केटेगरी। इसके तहत कई पदों पर परीक्षाएं ली गईं। इंटर लेबल के पद के लिए- जूनियर क्लर्क कम टाइपिस्ट, एकाउंट क्लर्क कम टाइपिस्ट, ट्रेन क्लर्क, कॉमर्शियल कम टिकट क्लर्क, जूनियर टाइम कीपर के लिए परीक्षा ली गई। ग्रेजुएशन लेबल के लिए कॉमर्शियल अपरेंटिस, ट्रैफिक असिस्टेंट, गुड्स गार्ड, सीनियर कॉमर्शियल कम टिकट क्लर्क, सीनियर क्लर्क कम टाइपिस्ट, सीनियर टाइम कीपर, स्टेशन मास्टर, जूनियर एकाउंट असिस्टेंट कम टाइपिस्ट पदों पर परीक्षा ली गई।

इंटर पास अभ्यर्थियोंको ऐसा लगता है कि उनका का हक ग्रेजुएशन पास वालों ने मार लिया- हालाँकि यह बात वैकेंसी के नोटिफिकेशन के साथ ही निर्धारित हो गयी थी कि कौन सा पद इंटर पास स्टूडेंट के लिए और कौन सा पद ग्रेजुएशन पास स्टूडेंट के लिए होगा। वैकेंसी जब निकाली गई थी तब कहा गया था कि ग्रेजुएशन के स्टूडेंट सभी पद पर आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इंटर पास स्टूडेंट के लिए पद चिन्हित हैं।

बताया जा रहा है कि इस परीक्षा का रिजल्ट जब आया तो हुआ यह कि इंटर वाले चिन्हित ज्यादातर पदों पर भी ग्रेजुएशन के स्टूडेंट का कब्जा हो गया। इससे इंटर पास अभ्यर्थी बड़ी संख्या में बाहर हो गए। अब इंटर पास अभ्यर्थियों का गुस्सा भड़का हुआ है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इसका समाधान वेटिंग लिस्ट से किया जा सकता था। 

रेलवे ने पहले कहा था कि वह 35,281 पदों को भरने पर विचार कर रहा है, इनमें से 13 श्रेणियों में 24,281 पद स्नातक के लिए थे और छह श्रेणियों में 11,000 पद गैर-स्नातक के लिए थे।  इन 13 श्रेणियों को सातवें केंद्रीय वेतन आयोग के वेतनमान स्तर (स्तर 2, 3, 4, 5 और 6) के आधार पर पांच समूहों में विभाजित किया गया था।  इन पदों में ट्रेन असिस्टेंट, गार्ड, जूनियर क्लर्क, समयपाल और स्टेशन मास्टर शामिल हैं।  लेवल 2 की नौकरी पाने पर शुरुआती वेतन लगभग 19,000 रुपये है और इसके लिए कक्षा 12 पास होना आवश्यक है। स्टेशन मास्टर जैसे लेवल-6 के पद के लिए स्नातक होना जरूरी है, लेकिन शुरुआती वेतन लगभग 35,000 रुपये है। उम्मीदवारों का आरोप है कि पिछले साल आयोजित कंप्यूटर आधारित टेस्ट-1 के दौरान लेवल 2 की परीक्षा में उच्च योग्यता वाले उम्मीदवार बैठे। 

एक अभ्यर्थी ने सोशल मीडिया पर यह लिखा कि, ‘अगर कम योग्यता वाले उम्मीदवार ऐसी नौकरियों के लिए बैठते हैं, तो हम इन नौकरियों को पाने की कल्पना भी कैसे करेंगे जो हमारे लिए हैं?’ रेलवे अधिकारियों ने कहा है कि अब समस्या यह है कि रेलवे उच्च योग्यता वाले उम्मीदवारों को कम योग्यता की आवश्यकता वाली परीक्षा में बैठने से नहीं रोक सकता है।  

छात्रों द्वारा  किये जा रहे इस प्रदर्शन का मुख्य कारण भर्ती में कुल पदों की संख्या को लेकर भी है जो कि आवेदनकर्ता के हिसाब से देखा जाये तो बहुत कम है।  RRB- NTPC की इस परीक्षा में कुल पदों की संख्या- 35281 है जबकि आवेदन कर्ता की संख्या- 12588524 है। ये परीक्षा विभिन्न चरणों में हुई थी जिसमे –

  • 1st फेज में स्टूडेंट्स की संख्या- करीब 23 लाख (28 दिसंबर 2020 से 13 जनवरी 2021तक)
  • 2nd फेज- 27 लाख (16 से 30 जनवरी 2021)
  • 3rd फेज- 28 लाख (31 जनवरी से 12 फरवरी)
  • 4th फेज- 15 लाख (15 फरवरी से 3 मार्च)
  • 5th फेज- 19 लाख (4 से 27 मार्च)
  • 6th फेज- 6 लाख ( 1 से 8 अप्रैल)
  • 7th फेज-2.78 लाख ( 23 जुलाई से 31 जुलाई 2021 तक) गठित की गयी थी।  

रेल मंत्री ने कहा की हम छात्रों के साथ है

छात्रों के लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन को देखते हुए रेलवे की तरफ से 26 जनवरी की सुबह परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया गया। इसके अल्वा रेल मिनिस्ट्री ने छात्रों से बात करने के लिए एक पांच सदस्यीय हाई पावर कमेटी का गठन भी किया है। यह कमेटी परीक्षा में पास और फेल हुए अभ्यर्थियों की शिकायत को सुनेगी और इसकी रिपोर्ट रेल मिनिस्ट्री को सौंपेगी। इसके बाद रेल मंत्रालय आगे का निर्णय लेगा। फिर दोपहर बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।  उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए छात्रों से कानून को हाथ में ना लेने की अपील की और उन्होंने यह भी कहा कि वो छात्रों द्वारा की गई शिकायतों को लेकर गंभीर हैं।

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में रेल मंत्री ने एक तरह से सफाई भी पेश की, उन्होंने कहा कि लगभग सवा करोड़ लोगों ने लेवल-1 में एप्लाई किया, तो एक एग्जाम मुमकिन नहीं है। अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि यह बात नोटिस में थी कि अगर जरूरत पड़ेगी तो दो एग्जाम लेंगे। दोनों एग्जाम में एक करोड़ से ज्यादा आवेदन हैं हमे एजेंसी हायर करने में वक्त लगा जिसमे सामान्यतः छह महीने से ज्यादा वक्त लगता है और फिर कोरोना आ गया अब दिसंबर में प्रोसेस चालू किया गया है जिसमे ग्रुप डी के बच्चे CAT में चले गए थे और करीब पांच लाख बच्चों के फोटो मैच नहीं कर रहे थे इस फैसले के बाद इतने बड़े एग्जाम को मद्देनजर रखते हुए काम करने में समय लगता है।  

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे यह भी कहा कि, 

“RRB के जितने भी चेयरमैन हैं, उन सभी को ये आदेश दिया गया है कि छात्रों की समस्या को सुनें और जल्द से जल्द कमेटी तक पहुंचाए, इसके लिए एक ई-मेल भी बनाया गया है।  यह कमेटी देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर समस्या को सुनकर उसका समाधान निकलेगी।”

रेल मंत्री ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से कहा, 

“मैं अपने छात्र मित्रों से निवेदन करना चाहूंगा कि रेलवे आपकी संपत्ति है, आप अपनी संपत्ति को संभालकर रखें. पुलिस प्रशासन कानून-व्यवस्था के आधार पर काम कर रहा है, कोई भी सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ न करें।”

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एक समाधान खोजना होगा कि जिन लोगों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, वे पीड़ित न हों, लेकिन जिन्हें शिकायतें हैं, उन्हें भी संबोधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बहुत संवेदनशीलता के साथ काम किया है इसलिए मै सारे छात्र बंधुओं से अनुरोध करूंगा कि वे अपने मुद्दों को औपचारिक तौर पर रखें, हम संवेदनशीलता के साथ इस पर विचार करेंगे। हम इस मुद्दे को जल्द से जल्द हल चाहते हैं इसके लिए हमारी कमेटी को 4 मार्च तक रिपोर्ट देनी है।  

देश में कई दशकों बाद यूथ अनरेस्ट की आवाज UP और बिहार से क्यों ?

सरकार का यही काम होता है कि नागरिकों में सरकार के प्रति विश्वास बनाये रखें।   लोगों में यह भरोसा रहे कि हमारी चुनी हुई सरकार जो भी कर रही है वो हमारे हित के लिए ही है, अगर कहीं से भी जनता के बीच में संदेश जाता है कि जो हो रहा है उनके हितों के खिलाफ हो रहा है तो जनता उद्वेलित होती है चाहे वो केंद्र सरकार हो जिसके अधीन रेलवे मंत्रालय आता है या चाहे राज्य सरकार हो, जिसका कार्य राज्य में  कानून व्यवस्था बनाए रखना होता है। दोनों की जिम्मेदारी है कि जनता में असंतोष न पनपे। 

छात्रों के बीच यह असंतोष 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान हो रहा है और कोई भी सरकार जो सत्ता में है, ऐसा नहीं चाहेगी कि इस तरह का असंतोष चुनावों के दौरान पैदा हो। 

हालांकि बिहार में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की सरकार है और जाहिर है कि ये सरकार कभी नहीं चाहेगी कि इन आंदोलनों का असर पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के चुनावों पर पड़े।  तो आखिर क्यों ये सरकार जनता को हिंसक होने पर मजबूर कर रही है,  कोई भी आंदोलन किसी एक दिन या एक घटना का परिणाम तो नहीं होता है, असंतोष की चिंगारी बहुत दिन से जलती रहती है और एक दिन भड़क ही जाती है।   आखिर सरकारें क्यों नहीं समझ पा रही हैं कि बेरोजगारी अब एक बड़ी समस्या का रूप ले रही है। इसका हल जल्दी नहीं निकला तो हालात फिर क्या होंगे इसकी कल्पना कोई भी नहीं कर सकता। 

अगस्त 2021 के बाद से बेरोजगारी दर में जबरदस्त इजाफा हुआ है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की ओर से जारी आकंड़ों के अनुसार, दिसंबर 2021 में बेरोजगारी दर बढ़कर 7.91 प्रतिशत पर पहुंच गई। नवंबर महीने में ये दर 7 प्रतिशत थी। वहीं, अगस्त के महीने की बात करें तो, उस समय बेरोजगारी दर 8.3 प्रतिशत थी,  यानि की अगस्त 2021 के बाद यह आंकड़ा सबसे ज्यादा है। देश में बढ़ती बेरोजगारी चिंता का विषय जरूर है, और खासकर तब, जब शहरों में ही बेरोजगारी दर 9.30 फीसदी के स्तर पर पहुंच गया हो।  

युवा वर्ग लगातार रोजगार की मांग कर रहा है, लेकिन हालात कुछ ऐसे हैं कि, जो लोग कई बार पेपर क्लियर कर चुके हैं, उनको भी अबतक नौकरियां नहीं मिली हैं।   वहीं कोरोना वायरस के चलते जो थोड़े बहुत लोगों के पास रोजगार था, वो भी अपना रोजगार गंवा चुके है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी महेश व्यास के अनुसार दिसंबर, 2021 में रोजगार बढ़ा है, लेकिन नौकरी के इच्छुक लोगों की संख्या उससे कहीं ज्यादा बढ़ रही है।