राहुल गांधी ने एक बार फिर दिया विवादास्पद बयान: भारत की विदेश नीति को लेकर राहुल ने क्या कहां?

भारतीय मीडिया का एक बड़ा वर्ग नियमित रूप से हर गंभीर राजनीतिक बहस को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक लड़ाई के रूप में चित्रित करना चाहता है। इस प्रक्रिया में, विवादास्पद मुद्दा पृष्ठभूमि में घुल जाता है। सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी अपनी बयानबाजी को लेकर एक बार फिर चर्चे में खैर ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, राहुल गाँधी संसद में कुछ भाषण दे और उनके बयान को सोशल मीडिया पर ट्रोल न किया जाए ऐसा शायद ही कभी हुआ हो।

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source: lok sabha tv

आइये जानते है की इस बार राहुल गाँधी की किन बातो पर सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है, किसी को उनका भाषण बड़ा दमदार लगा तो तो किसी ने इस भाषण को लेकर राहुल गाँधी के सामने कई सारे सवाल खड़े कर दिए।

क्यों सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी ट्रेंड कर रहा है?

कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi speech in Parliament) ने बुधवार को संसद में सरकार पर ताबड़तोड़ निशाना साधा। इस दौरान उन्‍होंने (Rahul Gandhi Attacks Government) बेरोजगारी, गरीबी से लेकर युवाओं, पेगासस और चीन तक का मुद्दा उठाया। हर मसले पर उन्‍होंने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। लोकसभा में उनकी इस स्‍पीच को काफी सराहा गया है।

माइक्रो ब्‍लॉगिंग साइट ट्विटर (Rahul Gandhi trending on Twitter) पर उनकी स्‍पीच की काफी चर्चा होने लगी। देखते ही देखते वह ट्विटर पर सबसे ज्‍यादा ट्रेंड होने लगे।

अनुपम मित्तल नेट वर्थ

गांधी ने, वास्तव में, तीन महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनसे भारत वर्तमान समय में जूझ रहा है – बढ़ती बेरोजगारी, चीन और पाकिस्तान को घेरने में रणनीतिक विफलता और देश के संस्थागत ढांचे पर एक अभूतपूर्व हमला। ये चिंताएं हैं कि हर विपक्षी राजनीतिक दल और नागरिक समाज समूहों के स्कोर पिन-पॉइंट कर रहे हैं और जिस पर वे केंद्र सरकार से ठोस प्रतिक्रिया प्राप्त करने में विफल रहे हैं।

राहुल गाँधी ने केंद्र सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए? 

पहला, राहुल गाँधी ने सरकार से यह पूछा की 26 जनवरी के मौके पर किसी विदेशी मेहमान को क्यों नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा की यह सरकार की नाकामी है कि हम दुनिया से अलग थलग हो गए। यहाँ पर राहुल गाँधी से एक गलती हो गयी या ऐसा भी कह सकते है कि वो यह बात बोलते वक्त भावनाओ में बह गए। 

जबकि सच्चाई यह है कि  सरकार ने दिसंबर 2021 में सेंट्रल एशियाई देशों के पांच नेताओ को गणतंत्र दिवस के अवसर पर चीफ गेस्ट बनने के लिए इनविटेशन भेजा था वो पांच देश थे, कज़ाकिस्तान, तुरकबेनिस्तान, किर्गिस्तान, तज़किस्तान और उज्बेकिस्तान। इनका समारोह में हिस्सा लेना लगभग तय माना जा रहा था, पर हम सब जानते है कि नया साल आया और साथ में ओमिक्रोण आया, भारत में इसके मामले तेज़ी से बढे और इसी बीच 18 जनवरी को यह ख़बर आयी की मेहमानो का आना संभव नहीं होगा।

ऐसा लगातार दूसरी बार हुआ और यह सब जानते की वो Covid-19 की वजह से हुआ। इस साल मेहमान भारत तो नहीं आये पर 27 जनवरी को एक वर्चुअल समिट के जरिये यह पांचो देश मोदी के साथ जुड़े जिसमे अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई, इसके अलावा इन देशो के साथ भारत के सम्बन्ध कैसे मजबूत हो इस पर भी चर्चा हुई। राहुल गाँधी का आरोप इन सब बातो को जाने बिना लगाया गया इसीलिए यह आरोप यहीं खारिज हो जाता है।  

राहुल गाँधी का दूसरा आरोप यह था कि वर्षो से भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा मकसद पाकिस्तान और चीन को अलग रखने का था लेकिन भारत ने इन्हे एक दूसरे के करीब ला दिया  जो कि भारत के लिए खतरे की बात है। यह bjp का भारत के लोगो के साथ किया गया सबसे बड़ा अपराध है।  

इस बयानबाजी पर BJP ने अपना पक्ष कैसे रखा ?

विदेश मंत्री एस. जयशंकर, इन्होने ट्विटर पर लिखा कि “जो लोग भारत में रहते उन्हें यह पता है की देश में कोरोना की लहर चल रही है, इनका तंज राहुल की विदेश यात्राओं पर भी था, उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या उनको 27 जनवरी की समिट के बारे में कुछ पता नहीं था क्या”? 

राहुल गाँधी के दूसरे आरोप पर विदेश मंत्री ने लिखा कि “राहुल गाँधी को इतिहास पढ़ने की जरुरत है, उन्होंने कहा कि सक्षम घाटी को पाकिस्तान ने 1963 में अवैध तरीके से छीनकर छीनकर चीन के हवाले कर दिया था”

राहुल गाँधी के आरोपों का मसला अमेरिका में भी उठा, अमरीकी विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों ने इस पर सवाल पूछा, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसका जवाब दिया और कहा कि वो इस बयान का समर्थन नहीं करते है उनका कहना था कि यह चीन और पाकिस्तान के आपस की बात है, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है।