दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022: चुनाव आयोग ने वार्डों के आरक्षण में किया बदलाव

राज्य चुनाव अधिकारियों के अनुसार वॉर्ड रोटेशन को लेकर आयोग ने चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव संपन्न होने के बाद से ही तैयरियां शुरू कर दी थीं, लेकिन, राजनीतिक दलों को इस पर सुझाव के लिए 12 जनवरी को मीटिंग बुलाई गई थी। इस दौरान अगल-अलग राजनीतिक पार्टियों ने सुझाव भी दिए, जिसकी रेकॉर्डिंग भी की गई। इसके अलावा कुछ राजनीतिक पार्टियों ने रोटेशन को लेकर लिखित सुझाव भी दिए।

सभी राजनीतिक दलों के सुझाव पर विचार करने के बाद एक बेहतरीन रोटेशन प्लान तैयार किया गया है, जिसकी घोषणा  चुनाव आयोग द्वारा इस मंगलवार को की गयी है। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि 2017 के चुनाव में वॉर्ड रोटेशन की घोषणा 6 फरवरी को की गई थी, लेकिन इस बार उससे काफी पहले ही यह घोषणा कर दी जा रही है, ताकि राजनीति पार्टियों को चुनाव की तैयारियों के लिए काफी समय मिल सके।

राज्य चुनाव आयोग ने तीनों नगर निगम (पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी) की 272 सीटों के नए सिरे से आरक्षण की घोषणा कर दी है। हाल ही में जारी हुए इस आदेश के अनुसार दक्षिणी नगर निगम में 104 में से 15 तो उत्तरी नगर निगम में 104 में 20 और पूर्वी नगर निगम में 64 में 11 वार्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए हैं। दिल्ली के ज्यादातर वार्डो का आरक्षण अब बदल गया है।

सामान्य नियम के तहत वह सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई हैं जो कि पहले सामान्य वर्ग के लिए थी। हालांकि, अनुसूचित जाति की सीटों में चुनाव आयोग ने बदलाव किया है। वहीं दूसरी ओर, आरक्षित सीटों में भी काफी बदलाव किया गया है। वह सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है जो कि पहले सामान्य थी।

नगर निगम के द्वारा रोटेशन की प्रक्रिया से अधिकतर वर्तमान पुरुष पार्षदों की सीट आरक्षण में चली गई हैं, या तो वह सीट महिला की हो गई या फिर उसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है।

राजधानी में तीनों नगर निगमों में भाजपा सत्तारुढ हैं। वर्ष 2007 के बाद 2012 और 2017 में बहुमत लेकर भाजपा ने सरकार चलाई है। ऐसे में यह भाजपा चौथी बार भी सत्ता में बरकरार रहने के कोशिश में जुटी हुई है। जबकि बीते 2017 के निगम चुनाव में पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी (आप) मुख्य विपक्षी पार्टी थी। वर्ष 2007 और 2012 में मुख्य विपक्षी पार्टी रही कांग्रेस 2017 के चुनाव तीसरे स्थान पर चली गई थी। अब नगर निगम ने चूंकि सभी सीटों का आरक्षण तय कर दिया है तो अब इसी हिसाब से प्रत्याशी चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे।

नगर निगम की सीटें आरक्षित

दक्षिणी नगर निगम

कुल सीट: 104

सामान्य-44

महिला (सामान्य)-45

अनुसूचित जाति-8

महिला (अनुसूचित जाति)-7

उत्तरी नगर निगम

कुल सीट: 104

सामान्य: 42

महिला (सामान्य): 42

अनुसूचित जाति:10

महिला (अनुसूचित जाति):10

पूर्वी नगर निगम

कुल सीट: 64

सामान्य: 26

महिला (सामान्य): 27

अनुसूचित जाति: 5

महिला (अनुसूचित जाति):6

कई प्रमुख नेताओ की सीटें आयी आरक्षित श्रेणी में

रोटेशन के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के महारथी नेताओं की सीटें भी आरक्षित हो गई है। ऐसे में उन्हें फिर से चुनाव लड़ने के लिए नई सीट की तलाश करनी होगी। उत्तरी नगर निगम में पूर्व महापौर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता, वर्तमान महापौर राजा इकबाल सिंह और पूर्व महापौर जय प्रकाश ऐसे ही दक्षिणी नगर  निगम में वर्तमान महापौर मुकेश सुर्यान जबकि पूर्व महापौर नरेंद्र चावला की सीट भी महिला के लिए आरक्षित हो गई है।

पूर्वी नगर निगम में वर्तमान महापौर श्याम सुंदर अग्रवाल, पूर्व महापौर बिपिन बिहारी सिंह समेत कद्दावर पार्षदों की सीट भी आरक्षित हो गई है। ज्यादातर सीटों पर महिला आरक्षण हुआ है। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के उत्तरी नगर निगम नेता प्रतिपक्ष विकास गोयल, दक्षिणी नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष प्रेम चौहान और पूर्वी नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष मनोज त्यागी की सीट या तो महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई है या अनुसूचित जाती के लिए।