रूस-यूक्रेन में युद्ध का आगाज़ – यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए क्या करेगी भारत सरकार?

कई दिनों के तनावपूर्ण माहौल व आशंकाओं के बाद आखिरकार रूस व यूक्रेन के बीच युद्ध की आगाज़ हो ही गई। इस युद्ध ने यूरोप में महायुद्ध व तीसरे विश्व युद्ध के हालात पैदा कर दिए हैं। रूस ने भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने का एलान किया है तो अमेरिका के नेतृत्व में नाटो भी मैदान संभाल सकता है।

यूक्रेन ने भी अपनी ओर से  जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। यूक्रेन की राजधानी कीव समेत वहां अलग-अलग हिस्सों में धमाके सुने जा रहे है ये भी कहा जा रहा है कि कीव पर क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला हुआ है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन-रूस के युद्ध को अब और टाला नहीं जा सकता है इसलिए रूस स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च कर रहा है।

इसका लक्ष्य यूक्रेन का गैरफौजीकरण है, पुतिन ने यूक्रेन की सेना को कहा है कि वह हथियार डालें और अपने घर जाये ।

भारत पर इस युद्ध का क्या असर होगा?

भारतीय अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध का गहरा प्रभाव देखने को मिलेगा क्योंकि अगर ये लड़ाई तीसरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ी तो व्यापारिक गतिविधियों पर निगेटिव प्रभाव अवश्य होगा। सबसे पहले कच्चे तेल के दाम जो पहले ही 101 डॉलर प्रति बैरल पर जा चुके हैं, उनमें और आग लग सकती है और भारत के लिए ऐसा होना बेहद नकारात्मक साबित होगा। देश का आयात खर्च बढ़ेगा जिसके चलते व्यापार घाटा भी और ऊपर जाएगा। फिलहाल तो कच्चे तेल के बढ़ते दामों का भार ऑयल एंड गैस मार्केटिंग कंपनियों ने ग्राहकों पर नहीं डाला है लेकिन इसका कारण आंतरिक है। माना जा रहा है कि 10 मार्च के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम में एकमुश्त बड़ी बढ़ोतरी की जाएगी।   रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध से भारत में महंगाई बढ़ने के आसार नजर आने लगे हैं  अगर महंगाई बढ़ी तो रिजर्व बैंक के अनुमानित आंकड़ों से ये ऊपर चली जाएगी और फिर देश का केंद्रीय बैंक दरें बढ़ाने पर मजबूर हो जाएगा।  

भारत का रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या है रुख?

भारत का रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले में फिहल एक तटस्थ रुख है और भारत ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। हालांकि ये साफ है कि भारत के ऊपर और देश की अर्थव्यवस्था पर इस लड़ाई का नकारात्मक असर तो दिखने को मिलेगा ही और ऐसा इसलिए क्योंकि दोनों देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध हैं और जियो-पॉलिटिकल स्थिति बगड़ने की स्थिति में भारत की अर्थव्यवस्था के ऊपर कोरोनाकाल के बाद एक और प्रहार देखे जाने की आशंका है।  

कैसे होगी वापसी अब यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की?

भारत यूक्रेन में अपने 18,000 से अधिक छात्रों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। अभी के लिए, यूक्रेन में रूसी सैन्य कार्रवाई के कारण नई दिल्ली और कीव के बीच उड़ानें रोक दी गई हैं। हालांकि, सरकार स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

दूतावास ने नागरिकों को स्थानांतरण व्यवस्था पर अपडेट के लिए अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया का पालन करते रहने का निर्देश देते हुए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए।

भारत के लिए यूक्रेन छोड़ने का बेसब्री से इंतजार कर रहे ज्यादातर लोग इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्र हैं। कुछ लोगों को आश्चर्य होता है कि छात्र पढ़ाई के लिए यूक्रेन को अपने पसंदीदा स्थान के रूप में क्यों चुनते हैं?

छात्र अपनी मुद्रा का आदान-प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं क्योंकि यूक्रेनी दुकानों ने डॉलर का व्यापार बंद कर दिया है। कीव में भारतीय मिशन भारतीय नागरिकों को पश्चिमी सीमा पर स्थानांतरित करने की योजना बना रहा था और उन्हें हर समय अपना पासपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज अपने पास रखने की सलाह दी है।

तारास शेवचेंको नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में अपने जुड़वां भाई अंश के साथ पढ़ने वाली पंडिता ने कहा, “हम सुबह 4 बजे एक धमाके के साथ उठे, जब हमने देखा कि आसमान में सायरन बज रहा है।”

तारास शेवचेंको के अलावा, दो अन्य विश्वविद्यालय- बोगोमोलेट्स और यूएएफएम- में विभिन्न धाराओं में भारतीय छात्रों की अधिकतम संख्या है।

छात्र संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, यूक्रेन के पश्चिमी हिस्से में रूसी मिसाइलों के वीडियो का आदान-प्रदान कर रहे हैं लेकिन यह नहीं जानते कि सुरक्षित स्थान तक कैसे पहुंचा जाए। उनमें से कुछ जैसे अलीशा (बदला हुआ नाम) हॉस्टल में हैं जहां वे खुद खाना बना रही हैं और आसपास कोई फैकल्टी नहीं है।

औरंगाबाद के 21 वर्षीय ने मिंट को बताया, “हम दिसंबर में आए थे और तीन महीने के भीतर भारत वापस जाना संभव नहीं है। हॉस्टल में गार्ड हैं लेकिन कोई नहीं। हमारे पास सेल फोन चार्ज हैं लेकिन लाइट कभी भी बुझ सकती है।”

इवानो-फ्रैंकिव्स्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में द्वितीय वर्ष की छात्रा प्रीति साहू ने अपने कुछ सहपाठियों की तरह कीव की 10-12 घंटे की यात्रा को बहादुरी से करने की योजना बनाई है। इलाहाबाद के साहू ने कहा, “मैं कीव जाऊंगा या लविवि जाने और भारत के लिए उड़ान भरने की कोशिश करूंगा। हम पता लगा रहे हैं कि क्या पोलैंड हमें प्रवेश की अनुमति देगा और हम वहां से उड़ान भर सकते हैं।”

आखिर क्या कारण है कि यूक्रेन भारतीय छात्रों के बीच एक अकादमिक गंतव्य के रूप में बहुत लोकप्रिय है?- 

यूक्रेन में अधिकांश भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इसका कारण सरल और स्पष्ट है – यूक्रेन में निजी मेडिकल कॉलेजों की ट्यूशन फीस भारत के कॉलेजों की तुलना में काफी सस्ती है। यूक्रेनी कॉलेजों को विश्व स्वास्थ्य परिषद द्वारा भी मान्यता प्राप्त है। वहां की डिग्री भारत में बहुत अधिक मान्य हैं क्योंकि भारतीय चिकित्सा परिषद भी उन्हें मान्यता देती है।

इसके अलावा, यूक्रेन की मेडिकल डिग्री को पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल, यूरोपियन काउंसिल ऑफ मेडिसिन और यूनाइटेड किंगडम की जनरल मेडिकल काउंसिल द्वारा भी मान्यता प्राप्त है।