बप्पी लहरी ने 69 साल की उम्र में ही सबको कह दिया अलविदा: आइये  जानते है इस डिस्को किंग के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

कैसे हुई बप्पी लहरी की मौत?

एक अच्छे गायक-संगीतकार बप्पी लहरी के मौत की खबर बुधवार सुबह पता लगी। बताया यह जा रहा है कि वह कुछ समय से बीमार थे और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण मुंबई के जुहू के क्रिटिकेयर अस्पताल में भर्ती थे जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। वह 69 वर्ष के थे।

पीएम नरेंद्र मोदी, अभिनेता अजय देवगन और अक्षय कुमार और संगीतकार एआर रहमान सहित जीवन के सभी क्षेत्रों की हस्तियों ने लहरी को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, “श्री बप्पी लाहिड़ी जी का संगीत सभी को समेटे हुए था, खूबसूरती से विविध भावनाओं को व्यक्त करता था।

पीढ़ियों के लोग उनके कार्यों से संबंधित हो सकते हैं। उनका जीवंत स्वभाव सभी को याद होगा। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। शांति।”

क्रिटिकेयर अस्पताल के निदेशक डॉ दीपक नामजोशी ने मीडिया को बताया कि, “जनवरी में, बप्पी लहरी  को सीने में संक्रमण और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लिए इस अस्पताल में लाया गया था। वह यहां 29 दिनों तक भर्ती रहे, जिसमें 18 दिन वे आईसीयू में थे। फिर वह ठीक भी हो  गए थे और उनके  पैरामीटर स्थिर थे और वह फुफ्फुसीय पुनर्वास से गुजर रहे थे। 14 फरवरी सोमवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई।

वह करीब डेढ़ दिन घर पर रहे और फिर उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उनके परिवार ने हमें फोन किया तो हम एंबुलेंस लेकर उनके घर पहुंचे। वह मंगलवार को रात करीब 11.30 बजे यहां थे, और बहुत गंभीर हालत में थे, हमने उन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार मंगलवार की रात लगभग 11.40 – 11.45 बजे उनका निधन हो गया। ”

वह पिछले साल कोविड संक्रमण से पीड़ित थे। उन्हें पिछले 1 साल से OSA था। दीपक नामजोशी के इलाज में उन्हें कई मौकों पर क्रिटिकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया और सभी मौकों पर वे ठीक हो गए। 2021 में, गायक को कोरोनावायरस के लिए सकारात्मक परीक्षण के बाद एहतियात के तौर पर ब्रीच कैंडी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उस वर्ष बाद में यह बताया गया कि गायक ने अपनी आवाज खो दी थी।

लाहिड़ी ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में इन खबरों का खंडन करते हुए लिखा, “कुछ मीडिया आउटलेट मेरे और मेरे स्वास्थ्य के बारे में झूठी खबरें फैला रहे हैं, जिसे सुनकर मेरा दिल टूट जाता है। अपने प्रशंसकों और शुभचिंतकों की कृपा से मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं।”

भारतीय मुख्यधारा में डिस्को संगीत को लोकप्रिय बनाने के लिए जाने जाने वाले, गायक को बप्पी दा के नाम से जाना जाता था, और 1980 और 90 के दशक में बड़ी सफलता का अनुभव किया। उन्होंने डिस्को डांसर, नमक हलाल, डांस डांस, कमांडो जैसी फिल्मों में अपने काम की बदौलत ‘डिस्को किंग’ की उपाधि अर्जित की।

बप्पी लहरी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें:-

संगीतकार और गायक बप्पी लाहिड़ी का जन्म 27 नवंबर 1952 को कोलकाता में हुआ था। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘डिस्को किंग’ के नाम से भी जाना जाता है।बप्पी संगीत घराने से ताल्लुक रखते हैं, उनके पिता अपरेश लाहिड़ी भी बंगाली गायक थे और उनकी माता बांसरी लाहिड़ी भी फेमश संगीतकार थीं।बप्पी दा ने अपने माता-पिता से ही संगीत सीखा और पहली बार बंगाली फिल्म में गाना गाया था।

बप्पी लाहिड़ी ने 19 साल की उम्र में कोलकाता छोड़ मुमबई आ गए थे। बप्पी को साल 1973 में पहली बार ‘नन्हा शिकारी’ में संगीत देने का मौका मिला था। किशोर कुमार बप्पी के मामा थे। उन्होंने ही बप्पी को म्यूजिक इंडस्ट्री में लाया था। बप्पी दा ने तीन साल की उम्र में तबला सीखना शुरू किया और तभी से संगीत सिखना शुरू कर दिया था।

साल 1975 में आई फिल्म ‘जख्मी’ से बप्पी दा को पहचान मिली थी। इस फिल्म में बप्पी ने मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के साथ गाना गाया था। म्यूजिक इंडस्ट्री में पॉप का मिक्स्चर करने का श्रेय बप्पी दा को ही जाता है। उन्होंने अपने गानों में कई प्रयोग किए, जिसका काफी विरोध भी हुआ। बप्पी ने 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वह हार गए थे।

क्यों पहनते थे वो इतना ज़्यादा सोना ?

बप्पी दा ने तकरीबन 48 साल तक अपने बेहतरीन गानों के जरिए दर्शकों के दिल में जो जगह बनायीं थी वो शायद ही कोई बना पाए। उन्होंने तकरीबन 500 फिल्मों में 5000 से ज्यादा गाने कंपोज किए और गाए भी थे। बप्पी दा अपने म्यूजिक करियर के अलावा एक और चीज के चलते सुर्खियों में रहते थे।

वो ये था कि वह सोना पहनने के बेहद शौक़ीन थे,  एक इंटरव्यू में उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई थी और वो वजह यह थी कि,  “बप्पी दा ने कहा था कि वह अमेरिकन स्टार एल्विस प्रेस्ली के बड़े फैन थे एल्विस को उन्होंने हर परफॉरमेंस के दौरान सोने की चेन पहने देखा था तब बप्पी अपने स्ट्रगलिंग दौर में थे और उन्होंने ठान लिया था कि जब वह कामयाब होंगे तो वो भी खूब सारा सोना पहनेंगे

और जब वो कामयाब हुए तो उन्होंने ऐसा ही किया और इतना सोना पहना कि उन्हें इंडिया का गोल्ड मैन भी कहा जाने लगा।  

बप्पी दा का यह भी कहना था कि, सोना पहनना उनके लिए काफी लकी भी साबित हुआ इसलिए उन्होंने इसे कभी पहनना नहीं छोड़ा, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बप्पी दा के पास करीबन 50 लाख का सोना था। उनकी कुल संपत्ति तकरीबन 20 करोड़ रुपये बताई जाती है। 

बप्पी दा की ही तरह उनकी पत्नी चित्रानी भी सोने और डायमंड की शौकीन हैं। 2014 में उन्होंने बताया था कि उनके पास बप्पी दा से भी ज्यादा 967 ग्राम सोना, 8.9 किलो चांदी और 4 लाख रुपए के हीरे हैं।

एक टाइम ऐसा भी था जब वो इंडस्ट्री छोरना चाहते थे 

एक बार बप्पी दा बोले थे, ‘किशोर दा को मैं ‘किशोर मामा’ कहता था, उनके साथ बहुत सारी फिल्मों में मैंने गाने गाए थे, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद मुझे लगा की मुझे म्यूजिक का काम बंद कर देना चाहिए। 1987 में किशोर दा के जाने के बाद काम में बिल्कुल भी मन नहीं लगता था। फिर डैडी ने मुझे कहा कि किशोर मामा का आशीर्वाद तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा, काम मत छोड़ो। तब 1991 में शब्बीर कुमार ने मेरा गाना ‘गोरी हैं कलाइयां’ गाया और वो सुपरहिट हुआ। फिर कुमार सानू ने ‘जिंदगी एक जुआ’ में मेरे लिए गाना गाया।’